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Updated Wed, 08 May 2021 11:35 PM

दाम में मनमानी उछाल, गरीबों की पहुंच से दूर हुई 'दाल'

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : कोरोना वायरस संक्रमण का चल रहे दौर के साथ संक्रामक बीमारियों की भी बाढ़। रोजगार छूट जाने से तमाम परिवारों के समक्ष उत्पन्न आर्थिक तंगी। इलाज को लेकर कैसे दो वक्त के भोजन का जुगाड़ हो इसे लेकर आम जन परेशान है। ऐसे दौर में दाल की कीमतों में मनमानी उछाल ने समस्या बढ़ा दी है। विशेषकर 105 से 110 रुपये किलों तक पहुंच चुकी अरहर की दाल गरीबों की रसोईं से दूर हो चुकी है। देखा जाय तो करीब एक माह पहले तक 82 से 85 रुपये प्रति किलो बिक अरहर दाल का दाम मौजूदा समय में 105 से 110 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। जबकि मटर व चना की दाल 60 से बढ़कर 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है। हालांकि मसूर दाल 75 रुपये प्रति किलो के साथ अपनी जगह बरकरार है। गोपीगंज नगर में दाल के थोक व्यापारी घनश्याम जायसवाल ने बताया कि इस वर्ष अरहर की पैदावार अच्छी न होने के चलते दाम में बढ़ोत्तरी हुई है।

कोरोना टीका की राह में बाधा नहीं बनेगा पहचान पत्र अभाव

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण की राह में पहचान पत्र का अभाव बाधक नहीं होगा। ऐसे लोगों का टीकाकरण भी किया जाएगा जो किसी तरह का पहचान पत्र उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं। ऐसे लोगों को कोविन ऐप में पंजीकृत किया जाएगा, और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अमित दुबे ने बताया कि मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविग लाइसेंस, पैन कार्ड, एनपीआर कार्ड या पेंशन पेपर में से किसी एक पहचान पत्र का होना जरूरी है। यदि अगर किसी के पास यह पहचान पत्र नहीं हैं तो उन्हें वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता। इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेलों में निरूद्ध बंदी, मानसिक रोग अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केंद्रों में रह रहे मरीज व लोग इस श्रेणी में शामिल होंगे। इनका कोविन ऐप में पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिग दर्ज कराया जाएगा। मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी। इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे। जिसके बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

नौनिहालों के खाते में नहीं पहुंचा एमडीएम का कंवर्जन कास्ट

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : विभागीय उदासीनता कहें या फिर कुछ और, परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत 1.71 लाख नौनिहालों के दोपहरिया भोजन के लिए आए कंवर्जन कास्ट का धन विद्यालय प्रबंध समितियों के खाते की शोभा बना हुआ है। वह आज तक बच्चों के अभिभावकों के खाते में नहीं पहुंच सका है। उधर प्राधिकार प्रमाण पत्र जारी न होन से खाद्यान्न का भी वितरण नहीं हो रहा है। खाद्यान्न कोटेदारों के गोदामों में डंप है। इससे बच्चों को राशन व कन्वर्जन कास्ट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च 2020 से ही परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को फरवरी 2021 तक बंद कर दिया गया था। शासन इस अवधि का खाद्यान्न उन्हें वितरित कराने और कन्वर्जन कास्ट अभिभावकों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। पूर्व में क्रमश: 76 व 49 दिन का खाद्यान्न व कन्वर्जन कास्ट भेजा गया था। जबकि अप्रैल से पहले बंद रहे प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए 138 व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चों के लिए 124 दिन का खाद्यान्न वितरण शासन की ओर से 20,000 क्विटल खाद्यान्न आवंटित किया गया है। साथ ही 10 करोड़ रुपये कंवर्जन कास्ट भी अवमुक्त कर दिया गया है। अब देखा जाय तो करीब डेढ़ माह पहले आए खाद्यान्न का उठान भी कर लिया गया है लेकिन न तो बच्चों को खाद्यान्न का वितरण हो सका न ही कंवर्जन कास्ट की खाते में पहुंचा। वैसे इस संबंध में मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक सौरभ सिंह ने बताया कि बताया कि कंवर्जन कास्ट विद्यालयों के एमडीएम खाते में भेजा गया है। जहां से प्रधानाध्यापक बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजेंगे। जबकि आचार संहिता के चलते खाद्यान्न वितरण के लिए प्राधिकार जारी करने का आदेश अभी नहीं आया है। आदेश आते ही प्राधिकार पत्र जारी कर खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित कराया जाएगा।